Jagjit Singh "Koii mausam aisaa aae (कोई मौसम ऐसा आए)" lírica

कोई मौसम ऐसा आए
उस को अपने साथ जो लाए

लोगों से तारीफ़ सुनी है
उस से मिलकर देखा जाए

आज भी दिल पर बोझ बहुत है
आज भी शायद नींद ना आए

हाल है दिल का जुगनू जैसा
जलता जाए बुझता जाए

बीते लम्हें कुछ ऐसे हैं
खुशबू जैसे हाथ ना आए